Breaking

ComputerHindiMe लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ComputerHindiMe लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 22 मई 2020

मई 22, 2020

स्पीकर क्या है?स्पीकर कितने प्रकार के होते है?

स्पीकर एक एक्सटर्नल उपकरण है। जिसका इस्तेमाल साउंड/ऑडियो को सुनने के लिए क्या जाता है। स्पीकर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को ऑडियो सिंग्नल में बदलने का काम करता है। स्पीकर अलग अलग आकार और फ्रीक्वेंसी के आते है। स्पीकर की काम करने की झमता 3 चीजों पर निर्भर होती है।-
  • Frequency
  • THD(Total Harmonic Distortion)
  • Watts
Speaker Kitne Type Ke Hote Hai?inHindi

Frequency:-

यह साउंड की रेंज को नापता है। स्पीकर की आवाज कम या ज्यादा फ्रीक्वेंसी पर निर्भर होती है।

THD (Total Harmonic Distortion ):-

यह एम्पलीफायर दुवारा दिए गए सिंग्नल में से आवाज की डिस्टॉरशन को नापता है।आवाज की डिस्टॉरशन THD पर निर्भर होती है।

Watts:-

यह विस्तारण की झमता को मापता है। स्पीकर एम्पलीफिकेशन वाट्स पर निर्भर होती है।

Speaker कितने प्रकार के होते है?:-

स्पीकर फ्रीक्वेंसी और वाट्स के आधार पर काफी तरह के मिल जायेंगे लेकिन इन्हे इस्तेमाल करने के आधार पर ४ तरह से विभाजित किया गया है।-
  • PC Speaker
  • Multi-Channel Speaker
  • Standard Speaker
  • USB Speaker

PC Speaker:-

यह आकार में छोटे होते है।और इनका इस्तेमाल कंप्यूटर और लैपटॉप में ज्यादातर किया जाता है इसलिए इन्हे PC स्पीकर कहते है। ये कंप्यूटर में हैडफ़ोन जैक के माध्यम से जोड़े जाते है।

Multi-Channel Speaker:-

इन स्पीकर को हम वूफर के नाम से भी जानते है। क्युकी इसमें स्पीकर के साथ एक सवूफर होता है।इनकी ऑडियो क्वालिटी अच्छी होती है। इसमें अलग अलग तरह के जैसे-2.1, 4.1, 5.1 स्पीकर आते है। जिसमे 2-5 स्पीकर और  1 वूफर होता है। मतलब 2.1 Multi-Channel स्पीकर में 2 स्पीकर और एक वूफर होता है।

Standard Speaker:-

इन्हे ज्यादातर एक लकड़ी/प्लास्टिक के बॉक्स(कॉलम) में 2 स्पीकर का इस्तेमाल किया जाता है। यह स्पीकर अलग अलग आकार और फ्रीक्वेंसी में आते है। यह ज्यादातर ऑफिस और DJ इत्यादि में इस्तेमाल किये जाते है।

USB Speaker:-

इन स्पीकर को इस्तेमाल करने के लिए आपको कंप्यूटर या लैपटॉप से USB से जोड़ा जाता है।इनकी आवाज़ क्वालिटी अच्छी होती है।और यह साइज में भी काफी छोटे होते है। इन्हे आप PC/लैपटॉप स्पीकर भी कह सकते है। यह PC स्पीकर का अपडेटेड ही है जिनमे Voice क्वालिटी को Developed किया गया है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 22, 2020

कंप्यूटर में मदर बोर्ड क्या है?

मदरबोर्ड कंप्यूटर का एक मुख्य पार्ट PCB होता है। इसे PC का बैकबोन भी कहते है। जिसमे सभी आवश्यक पार्ट्स जुड़े रहते है। कंप्यूटर में मदर बोर्ड को System Board, Main circuit Board और लॉजिक बार्ड के नाम से भी जाना जाता है। मदर बोर्ड एक प्लास्टिक की तरह शीट होती है जिसमे उपकरणो को जोड़ने के लिए अलग अलग पोर्ट बने होते है।और बोर्ड में आवश्यक कंपोनेंट्स सोल्डरिंग दुवारा जुड़े रहते है।
Mother board Kitne Type ke Hote Hai?

Mother Board कितने प्रकार के होते है?:-

वैसे तो मदर बोर्ड काफी सारे फीचर्स और झमता में उपलब्ध है यह फीचर्स मदर बोर्ड के निर्माता कम्पनी पर निर्भर है। इसलिए इनके मुख्य फीचर्स के आधार पर इन्हे 2 वर्गों में बाँटा जा सकता है।
  • Integrated Mother Board
  • Non-Integrated Mother Board 

1.Intergrated Mother Board:-

इन मदर बोर्ड में उपकरण को जोड़ने के लिए अलग अलग पोर्ट्स/सॉकेट बनाये जाते है। इंटीग्रेटेड मदर बार्ड में पोर्ट दुवारा जुड़े उपकरण को आप अपनी जरुरत के हिसाब से अपग्रेड कर सकते हो। आजकल कंप्यूटर/लैपटॉप में इन्ही मदर बोर्ड का इस्तेमाल क्या जाता है।

2.Non-Integrated Mother Board:-

इन मदर बोर्ड में पार्ट्स सोल्डरिंग दुवारा जुड़े रहते है।इनमे पोर्ट का इस्तेमाल नहीं किया जाता जिस बजह से हम इन्हे अपग्रेड नहीं कर सकते।नॉन-इंटीग्रेटेड मदर बोर्ड का इस्तेमाल मोबाइल फ़ोन्स और टेबलेट इत्यादि में किया जाता है।

मदर बोर्ड का क्या काम है?:-

मदर बोर्ड सहायक उपकरण को जोड़ने के लिए जगह उपलब्ध करता है।यह कनेक्टेड उपकरण को पावर सप्लाई पहुंचाने और उन्हें मैनेज करने का काम करता है। मदर बोर्ड कंप्यूटर की बायोस सेटिंग और इनफार्मेशन को सेव रखता है जिससे कंप्यूटर आसानी से ऑन हो सके।

मदर बोर्ड के मुख्य भाग।:-

1.Circuit:-मदर बोर्ड में काफी सारे कंपोनेंट्स चिपसेट एक दूसरे से प्रिंटेड वायर दुवारा कनेक्टेड होते है जो कंप्यूटर का सर्किट होता है। यह सर्किट फीचर्स और कंपोनेंट्स के प्रकार पर डिज़ाइन किया जाता है।
2.Serial Port:-इसका उपयोग एडिशनल माउस, मॉडेम को जोड़ने के लिए किया जाता है।
3.Parallel Port:-इस पोर्ट के मदद से प्रिंटर को जोड़ा जाता है। इसे प्रिंटर पोर्ट भी कहते है। यह पोर्ट 25 Pin में होता है।
4.PS/2 Port:-इन पोर्ट का आकार गोल होता है।जिससे माउस और कि बोर्ड को जोड़ा जाता है।आज के समय में इन पोर्ट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
5.USB Port:-इन पोर्ट दुवारा माउस किबोर्ड हार्ड डिस्क पेन ड्राइव इत्यादि को जोड़ा जाता है। इसकी डाटा ट्रांसफर करने की झमता ज्यादा होती है इसलिए इस पोर्ट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है।
6.VGA Port:- यह सीरियल पोर्ट के जैसा ही होता है।इसका इस्तेमाल कंप्यूटर मॉनिटर को जोड़ने के लिए किया जाता है।
7.Power Connector:-इसका इस्तेमाल मदर बोर्ड को एसएमपीएस से पावर कनेक्ट करने के लिए किया जाता है।
8.External Port:-इस पोर्ट दुवारा नेटवर्क केबल(Cable) को जोड़ा जाता है।
9.Game Port:- इस पोर्ट के दुवारा गेम जॉयस्टिक और कंसोल को जोड़ा जाता है। लेकिन आज के समय में इसके जगह USB पोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
10.DVI Port:- Flate LCD ,LED को जोड़ने के लिए इस पोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
11.Socket:- यह पोर्ट गोल और छोटे साइज के होते है। जिनके दुवारा स्पीकर, हेडफोन्स और माइक्रोफोन को जोड़ा जाता है।

Top मदर बोर्ड निर्माता कंपनी।:- 

  • ASRock
  • Asus
  • Gigabyte
  • Biostar
  • EVGA Corporation
  • MSI(Micro-Star International)

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 22, 2020

कंप्यूटर CPU क्या है?और कैसे काम करता है?

CPU कंप्यूटर का महत्वपूर्ण भाग है। CPU को कंप्यूटर का ब्रेन भी कहा जाता है CPU को कंप्यूटर का ब्रेन इसलिए कहते है क्युकी कंप्यूटर CPU के बिना कोई भी काम नहीं कर सकता कंप्यूटर की इतनी भी सॉफ्टवेयर &Hardware प्रोसेसिंग होती है।वो सब CPU दुवारा ही की जाती है यह कंट्रोलर के तरह भी काम करता है।
Computer CPU Ke Parts Kon Kon Se Hai?in Hindi
वैसे तो CPU एक चिप होती है जो की कंप्यूटर के र्बोर्ड में लगी होती है।CPU कंप्यूटर लैपटॉप मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणो में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कंप्यूटर में हम CPU के पुरे सिस्टम बॉक्स को CPU कहते है।CPU अपना काम 5 असिस्टेंट उपकरण की मदद से पूरा करता है।-
  • Memory
  • Control Unit
  • ALU
  • Mother Board
  • SMPS

Memory का क्या काम है?:-

Memory Ka Kya Work hai? In Hindi

मेमोरी को आप कंप्यूटर का Store House भी कह सकते है।क्युकी इसका काम डाटा को स्टोर करने का होता है। CPU इंस्ट्रक्शन और डाटा को पहले मेमोरी में स्टोर करता है। फिर डाटा को प्रोसेस करने के बाद मेमोरी में ही स्टोर कर देता है।  इस काम के लिए कंप्यूटर अलग अलग मेमोरी का इस्तेमाल करता है। इनपुट डाटा को रखने के लिए RAM का इस्तेमाल किया जाता है और प्रोसेस के बाद आउटपुट डाटा के लिए ROM का इस्तेमाल होता है।

Control Unit का क्या काम है?:-

Control Unit Kya Kam Karti Hai?in Hindi

Control Unit जिसे CU भी कहते है। CU कंप्यूटर का मैनेजर होता है। जो सभी ऑपरेशन्स को मैनेज करता है। कण्ट्रोल यूनिट मेमोरी से प्राप्त इंस्ट्रक्शन को डिकोड करके CPU को भेजती है। फिर उस पर्टिकुलर इवेंट को प्रोसेस किया जाता है।

ALU का क्या काम है?:-

Arithmetic logic Unit Kya Hai? in Hindi

ALU का पूरा नाम  Arithmetic Logical Unit होता है। इसका काम सिर्फ Mathematical काम करना है। ALU Mathematics Functions में जोड़, घटा, भाग, इत्यादि करके परिणाम देता है।

Motherboard का क्या काम है?:-

Mother Board Ka Kya Work Hai?in hindi
मदर बोर्ड एक तरह से सर्किट ही होता है जिसमे सारे पार्ट एक दूसरे से जुड़े रहते है। मदर बोर्ड के बारे में डिटेल में जानने के लिए यहाँ क्लिक करके मदर बोर्ड क्या है? इसे पढ़े।

SMPS का क्या काम है?:-

Power Supply Ka Kya Kam Hai ? in Hindi

SMPS का काम इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई करना है।और जैसा की हम जानते है की कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसे बिना इलेक्ट्रिसिटी के काम करना संभव नहीं है। और CPU को काम करने के लिए भी पावर की जरुरत होती है इसलिए हम इसे CPU का मुख्य पार्ट भी मान सकते है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 22, 2020

प्राइमरी मेमोरी क्या है?प्राइमरी मेमोरी के प्रकार।

प्राइमरी मेमोरी में डाटा जानकारी और प्रोग्राम प्रॉसेस समय मौजूद रहते है।जरूरत पड़ने पर तुरंत Run होते है।यह अस्थिर मेमोरी होती है। जिसका डाटा कंप्यूटर/लैपटॉप के बंद होने पर मिट जाता है।प्राइमरी मेमोरी को Main Memory भी कहा जाता है।
Primary Memory Kitne Prakar Ki  Hai ?In Hindi

Primary Memory कितने प्रकार की होती है?:-

प्राइमरी मेमोरी 2 प्रकार की होती है। जिनके बारे निचे बताया गया है:-
  • RAM( Random Access Memory)
  • ROM(Read Only Memory)

1.RAM (Random Access Memory)

Random Access Memory Kya Hai? In Hindi

RAM (Random Access Memory) कंप्यूटर कीअस्थायी मेमोरी होती है।इसमें डाटा अस्थायी स्टोर होता है।जिसे कंप्यूटर प्रोसेसर जरूरत के हिसाब से डाटा को अस्थायी डाटा से इस्तेमाल करता है। इसका डाटा कंप्यूटर के बंद होने पर मिट जाता है।इसलिए इसे Temporary Memory या Volatile Memory भी कहा जाता है।
उदाहरण:- आप इसे कुछ इस तरह से भी समझ सकते है। जब आप अपने कंप्यूटर में कोई भी काम जैसे-किसी फाइल को ओपन किया है या गूगल पेज को ओपन किया है इसका जो प्रोसेस है RAM के दुवारा होता है, जो की आपके कंप्यूटर के अचानक बंद होने के बाद आप फिर से अपने कंप्यूटर को ऑन करते है तो आपके सामने डायरेक्ट विंडो होम खुलता है।और आपका प्रोसेस डाटा फाइल गूगल पेज आटोमेटिक मिट यानि बंद हो जाता है।

RAM कितने प्रकार की होती है?:-

RAM 3 प्रकार की होती है- 
  • Dynamic RAM
  • Synchronous RAM
  • Static RAM
Dynamic Ram- डायनामिक RAM को DRAM कहा जाता है। RAM में सबसे ज्यादा साधारण DRAM होती है। DRAM के अंदर डाटा मेमोरी सेल में स्टोर होता है। जिसमे हर एक सेल में एक ट्रांसिस्टर और एक Capacitor का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हर ४ मिली सेकंड के बाद सेल कंट्रोलर मेमोरी को रिफ्रेश करते है। इसलिए DRAM काफी धीमे काम करती है।
Synchronous Ram- Synchronous RAM  की स्पीड DRAM से ज्यादा होती है। यह CPU क्लॉक स्पीड के बराबर रिफ्रेश होती है। इसलिए यह डाटा ट्रांसफर तेजी से करती है।
Static Ram- Static RAM बहुत कम रिफ्रेश होती है। इसी वजह से यह Data को मेमोरी में ज्यादा समय तक स्टोर कर पाती है।जब तक सिस्टम में करंट रहता है तब तक इसका डाटा स्टोर रहता है। यह RAM थोड़ी महंगी भी होती है।

ROM (Read only memory) क्या है?:-


ROM का पूरा नाम Read Only Memory है।ROM Permanent Memory होती है।जिसमे कंप्यूटर के निर्माण के समय प्रोग्राम को स्टोर किया जाता है। ROM में स्टोर प्रोग्राम को बदला या मिटा नहीं सकते है। इसलिए इसे रीड ओनली मेमोरी कहा जाता है। इसमें स्टोर प्रोग्राम स्थायी होते है जो की कंप्यूटर के बंद होने पर भी नहीं मिटते है।
उदाहरण:-आप इसे इस तरह से समझ सकते है। जब आप अपने कप्यूटर को ऑन करते है तो स्टार्टिंग में आपके कंप्यूटर के ब्रांड का नाम आता है जिसे आप सिर्फ पढ़ सकते है बदल या मिटा नहीं सकते यह नाम रीड ओनली मेमोरी में ही स्टोर किया जाता है।

ROM कितने प्रकार की होती है?:-

Rom 3 प्रकार की होती है जिनके बारे में आप निचे पढ़ सकते है।:- 

  • PROM (Programmable Read Only Memory)
  • EPROM (Erasable Programmable Read Only Memory)
  • EEPROM (Electrical Programmable Read Only Memory)
PROM:- PROM का नाम Programmable Read Only Memory है।PROM में डाटा स्टोर करने के बाद इसे बदल या मिटा नहीं सकते है।
EPROM:- EPROM पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory है।यह PROM की तरह ही है। लेकिन इसमें Save डाटा को Ultraviolet rays के दुवारा मिटाकर नये प्रोग्राम को स्टोर किया जा सकता है। 
EEPROM:- EEPROM Electrical Programmable Read Only Memory है। यह एक नयी टेक्नोलॉजी में Developed है। जिसके डाटा को इलेक्ट्रिक मेथड से मिटाया जा सकता है और नये प्रोग्राम को स्टोर कर सकते है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 22, 2020

कंप्यूटर क्या है?कितने प्रकार के होते है?

कंप्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। जिसके दुवारा उपयोगकर्ता Input Data में Process करके जानकारी को परिणाम में प्राप्त करता है। या आप ऐसे समझ सकते है कि कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो उपयोगकर्ता दुवारा दिए गए निर्देश का पालन करता है। Computer में हम Data को Store & Restore कर सकते है और आप अपने Documents को टाइप करने ,Email Send, Internet और Game खेलने इत्यादि के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकते है।  आज के टाइम में इतनी भी टेक्नोलॉजी Developed हुई है यह किसी न किसी रूप से कंप्यूटर से जुडी हुई है, इतनी हाई टेक्नोलॉजी का Development कंप्यूटर की वजह से ही संभव हुआ है।और हम अपने Daily Basis Life में कंप्यूटर Bases बने डिवाइस का उपयोग किसी न किसी रूप में करते है जैसे की स्मार्ट फ़ोन यह कंप्यूटर पर ही आधारित है। जिसे हम Pocket कंप्यूटर भी कह सकते है।  कंप्यूटर को हम 2 प्ररूप में ही जानते है Desktop और Laptop लेकिन यह अलग अलग प्ररूप में Available है। तो चलिए अब हम कंप्यूटर के प्ररूप के बारे में जानते है।
Computer Se Kya Hota Hai? In Hindi

कंप्यूटर कितने प्रकार के होते है?:-

कंप्यूटर को 3 भागों में विभाजित किया गया है। जो की निचे दिए गए है:-
  1. Based on Work(कार्य के आधार पर)
  2. Based on Purpose(उद्देश्य के आधार पर)
  3. Based on Size(आकार के आधार पर)

Based on Work कंप्यूटर कोन से है?:-

कार्य के आधार(Based on Work) पर भी कंप्यूटर को 3 भागों में विभाजित किया गया है:-
  • Analog Computer
  • Digital Computer
  • Hybrid Computer
Analog कंप्यूटर कोन से है?:-
Anlog Computer Ke Kya Work Hai? in Hindi

एनालॉग कंप्यूटर ऐसे कंप्यूटर सिस्टम है। जो Temperature ,Pressure, Voltage, Speed इत्यादि के Volume को मापता है। एनालॉग कंप्यूटर Physical Volumes को मापने के लिए जाने जाते है।उदाहरण- Voltmeater और A meter इत्यादि।

Digital Computer Kya Hai?:-

Digital Computer Ka Work Kya Hai? In Hindi

डिजिटल कंप्यूटर सिस्टम एनालॉग के विपरीत बाइनरी नंबर पर काम करते है। डिजिटल कंप्यूटर में सभी डाटा को ० और १ के रूप में Process किया जाता है। डिजिटल कंप्यूटर का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है।उदाहरण-Desktop,Tablet, इत्यादि।

Hybrid Computer कंप्यूटर कोन से है?:- 

hybrid Computer Ke Work Kya Hai?in Hindi

हाइब्रिड कंप्यूटर एनालॉग और डिजिटल से मिलकर बना है। इस पर हम एनालॉग और डिजिटल दोनों कंप्यूटर के काम कर सकते है। हाइब्रिड कंप्यूटर का इस्तेमाल Scientific Calculation ,Large Industries और Defense System में किया जाता है।

Based On Purpose कंप्यूटर कोन से है?:-

उद्देश्य के आधार पर कंप्यूटर को 2 वर्गों में विभाजित किया गया है।:-
  • Normal Computer 
  • Special Computer

Based on Size कंप्यूटर कोन से है?:- 

आकार के आधार पर कंप्यूटर को 4 भागो में विभाजित किया गया है।
  • Super Computer(सुपर कंप्यूटर)
  • Mini Computer(मिनी कंप्यूटर)
  • Mainframe Computer(मेनफ़्रेम कंप्यूटर)
  • Micro Computer(माइक्रो कंप्यूटर)

Super Computer कंप्यूटर कोन से है?:- 

यह कंप्यूटर सबसे फ़ास्ट होते है। सुपर कंप्यूटर १०० करोड़ इंस्ट्रक्शन एक सेकंड की स्पीड से काम कर सकते है।इनका इस्तेमाल Research&Development और मौसम पूर्वानुमान के लिए किया जाता है।

Mini Computer कंप्यूटर कोन से है:-  

मिनी कंप्यूटर काफी सरे कंप्यूटर को हैंडल कर सकते है।इन्हे नेटवर्क की तरह इस्तेमाल कर सकते है। इनकी काम करने की झमता अधिक होती है।और आकार में छोटे होते है। इसलिए इन्हे मिनी कंप्यूटर कहा जाता है।

Micro Computer कंप्यूटर कोन से है:-

माइक्रो कंप्यूटर में माइक्रो-प्रोसेसर को इसके सेंट्रल यूनिट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। बैंकिंग ऑफिस और घरो में इस्तेमाल होने वाले पर्सनल कंप्यूटर माइक्रो कंप्यूटर के अंदर ही आते है।

Mainframe Computer कंप्यूटर कोन से है:-

इन कंप्यूटर का इस्तेमाल बड़े बड़े इंस्टिट्यूट में डाटा संस्करण के लिए करते है। इनका आकार और कंप्यूटर से बड़ा होता है।और मेनफ़्रेम कंप्यूटर हर तरह से और अन्य कंप्यूटर से ज्यादा झमता के होते है। 

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 22, 2020

प्रिंटर क्या है?प्रिंटर किनते प्रकार के होते है?

प्रिंटर एक इलेक्ट्रॉनिक आउटपुट डिवाइस है। जिसका उपयोग डिजिटल जानकारी & पिक्चर को पेपर पर छापने(प्रिंट) के लिए किया जाता है। यह कंप्यूटर का एक्सटर्नल आउटपुट डिवाइस होता है। या आप ऐसे भी समझ सकते है की प्रिंटर सॉफ्ट कॉपी को हार्ड कॉपी में बदल देता है। प्रिंटर को कंप्यूटर के साथ केबल दुवारा जोड़ा जाता है।  लेकिन आज के टाइम में कई डिजिटल डिवाइस जैसे टेबलेट स्मार्ट फ़ोन, कम्प्यूटर इत्यादि।प्रिंटर फीचर्स को सपोर्ट करते है जिससे हम ब्लूटूथ, Wifi और क्लाउड टेक्नोलॉजी से प्रिंटर का इस्तेमाल कर सकते है।
Printer Kya Hai? In Hindi

प्रिंटर कितने प्रकार के होते है?:-

प्रिंटर को टेक्नोलॉजी और काम के आधार पर कई वर्ग में बाँटा जा सकता है। लेकिन प्रिंटर को मुख्य २ प्रकार में बाँटा गया है।-
  • इम्पैक्ट प्रिंटर(Impact Printer)
  • नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर(Non-Impact Printer)

Impact प्रिंटर कोन से होते है?:-

Impact Printer Ka Kya Work Hai?

इन प्रिंटर का इस्तेमाल पेपर पर लेटर्स को प्रिंट करने के लिए किया जाता है। इसमें लेटर्स को प्रिंट करने के लिए इंक भरी रिबन पर लेटर्स को मारा जाता है तब लेटर्स पेपर पर प्रिंट होते है। यह प्रिंटर टाइप राइटर के जैसे वर्क करता है। यह प्रिंटर आवाज बहुत ज्यादा करते है। इनकी प्रिंटिंग लागत कम होती है। इम्पेक्ट प्रिंटर को भी २ भागो में विभाजित किया गया है:-


  • Character Printer
  • Line Printer

Character Printer:-यह प्रिंटर एक बार में सिर्फ एक लेटर को ही प्रिंट कर सकता है। Character प्रिंटर से हम सिर्फ लेटर्स को प्रिंट कर सकते है, इस से ग्राफ़िक को प्रिंट नहीं किया जा सकता।Character प्रिंटर भी २ तरह के होते है:-
  • Dot Matrix Printer (DMP)
  • Daisy Wheel Printer
Line Printer:-यह प्रिंटर एक बार में पुरे लाइन को प्रिंट करता है। इसलिए इसे लाइन प्रिंटर कहा जाता है।  लाइन प्रिंटर को बार प्रिंटर भी कहा जाता है।

Non-Impact प्रिंटर कोन से होते है?:-

Non impact Printer Ka Kya Work Hai?


यह प्रिंटर रिबन पर लेटर्स को नहीं मारता है,और आवाज भी नहीं करता है। इसलिए इसे नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर कहा जाता है। इसकी प्रिंटिंग क्वालिटी बहुत अच्छी होती है। इन प्रिंटर से आप लेटर ग्राफ़िक दोनों को प्रिंट कर सकते है। इनके प्रिंट करने की लागत इम्पैक्ट प्रिंटर से ज्यादा होती है लेकिन इनकी क्वालिटी उतनी ही ज्यादा अच्छी होती है।नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर को भी २ वर्गों में विभाजित किया गया है।:-
  • Laser Printer(लेज़र प्रिंटर)
  • Inkjet Printer(इंकजेट प्रिंटर)

Laser Printer:-
यह प्रिंटर फोटोस्टेट मशीन की तकनीक पर काम करते है। इनकी प्रिंटिंग की क्वालिटी काफी अच्छी होती है।और यह लेज़र Rays के दुवारा पेपर पर प्रिंट करते है।

Inkjet Printer:-यह प्रिंटर रिबन Less होते है। इन प्रिंटर में रिबन की जगह पर कार्ट्रिज का इस्तेमाल किया जाता है।इसमें हम कलर ग्राफ़िक लेटर्स को क्वालिटी के साथ प्रिंट कर सकते है।आज कल इंकजेट प्रिंटर का ही इस्तेमाल किया जाता है। 

अन्य प्रिंटर के प्रकार:-

  1. Electromagnetic Printer(इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रिंटर)
  2. Electrostatic Printer(इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रिंटर)
  3. Thermal Printer(थर्मल प्रिंटर)
  4. Multi Printer(मल्टी-प्रिंटर)
1.Electromagnetic Printer:- इन प्रिंटर की प्रिंट करने की स्पीड बहुत ही तेज़ होती है, साथ में प्रिंट की क्वालिटी भी अच्छी होती है यह 20 लाइन्स एक मिनट्स में प्रिंट कर सकते है।
2.Electrostatic Printer:- इस प्रिंटर का इस्तेमाल बड़े पेपर पर प्रिंट करने के लिए किया जाता है। इनकी स्पीड और गुणवत्ता दोनों ही अच्छी होती है इनका इस्तेमाल प्रिंटिंग प्रेस में होता है।
3.Thermal Printer:-थर्मल प्रिंटर काफी धीमे होते है और यह महंगे भी होते है। यह प्रिंटर ऊष्मा पर काम करते है। Heat से इंक को पिघलाकर प्रिंट करते है।
4.Thermal Printer:-यह प्रिंटर Multi Task प्रिंटिंग और स्कैनिंग करते है। यह स्कैनर और प्रिंटर का Combine होते है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 22, 2020

कंप्यूटर हार्डवेयर क्या है?

हार्डवेयर कंप्यूटर को आकर देता है इसके बिना कंप्यूटर पूरा नहीं होता। आप इस तरह भी समझ सकते है कि कंप्यूटर के जिन पार्ट्स को देख और छू सकते है उसे हार्डवेयर कहते है। सरल भाषा  में कहे तो कंप्यूटर से जुड़े सभी फिजिकल पार्ट्स जिनकी मदद से कंप्यूटर को ऑपरेट करते है उसे हार्डवेयर कहा जाता है। उदाहरण:-

  • कीबोर्ड(Keyboard)
  • माउस(Mouse)
  • मॉनिटर(Moniter)
  • प्रिंटर(Printer)
  • सी.पी.यु.(CPU)
  • वेबकैम(Webcam)
Computer Hardware Kitne Prakar Ke Hote Hai? in Hindi

हार्डवेयर कितने प्रकार के होते है?:-

हार्डवेयर को २ भागों में बाँटा गया है।-

  • इनपुट हार्डवेयर (Input Hardware)
  • आउटपुट हार्डवेयर (Output Hardware)

Input हार्डवेयर क्या है?:-

जिन हार्डवेयर उपकरणो से कंप्यूटर को इनपुट दी जाती है। वह इनपुट हार्डवेयर श्रेणी में आते है। इसके बारे में और ज्यादा जानने के लिए यहाँ क्लिक करके पढ़े।

Output हार्डवेयर क्या है?:-

जिन हार्डवेयर उपकरणो से कंप्यूटर डाटा को आउटपुट करता है। वह हार्डवेयर उपकरण आउटपुट श्रेणी में आते है। इसके बारे में और ज्यादा जानने के लिए यहाँ क्लिक करके पढ़े।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।

गुरुवार, 21 मई 2020

मई 21, 2020

इंटरप्रेटर क्या होता है?और यह कैसे काम करता है?

इंटरप्रेटर एक कंप्यूटर प्रोग्राम सॉफ्टवेयर है जो की हाई लेवल भाषा को मशीनी भाषा में बदलता है। लेकिन यह काम तो कम्पाइलर भी करता है तो आप सोच रहे होंगे इन दोनों के बिच क्या डिफरेंट है। तो इंटरप्रेटर पुरे प्रोग्राम को मशीनी भाषा में नहीं बदलता है। यह हाई लेवल लैंग्वेज को एक एक लाइन करके निष्पादित करता है। 
interpreter Kaise Work Karta Hai?  in Hindi
अगर इस बिच में कोई भी गलती मिलती है तो बही पर Error दिखाकर रुक जाता है तब तक आगे काम  नहीं करता जब तक Error को ठीक नहीं किया जाता जबकि कम्पाइलर पुरे प्रोग्राम को Compile करता है, और बड़ी गलती मिलने पर ही रुकता है। कम्पाइलर के बारे में और ज्यादा जानने के लिए कम्पाइलर क्या है?यहाँ क्लिक करके पढ़े।
तो इंटरप्रेटर प्रोग्राम सॉफ्टवेयर एक कम्पाइलर प्रोग्राम की तरह ही होता है। बस इनके काम करने के नियम अलग अलग होते है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 21, 2020

कंप्यूटर भाषा क्या होती है?

जिस तरह व्यक्तिगत भाषाएँ होती है,और व्यक्ति व्यक्तिगत भाषाओं को ही समझ सकता है।इसी तरह कंप्यूटर की भी अपनी भाषा होती है और कंप्यूटर सिर्फ अपनी भाषा को ही समझ सकता है। कंप्यूटर सिर्फ बाइनरी डिजिट ० या १ को ही समझ पाता है। कंप्यूटर से कोई भी काम करने के लिए हमें ASCII कोड में जानकारी  देनी होती है।  ASCII कोड को हम कंप्यूटर भाषा भी कह सकते है।ASCII कोड क्या है?यहाँ पर क्लिक करके पढ़े।
Computer Language Kon Kon Si Hai? in hindi

कंप्यूटर भाषा कितने प्रकार की होती है?:-

 कंप्यूटर भाषा 3 प्रकार की होती है-
  • मशीनी भाषा(Machine Language)
  • संयोजन भाषा(Combination Language)
  • ऊँच्चस्तरीय भाषा(High Level Language)
1.मशीनी भाषा(Machine Language):- कम्प्यूटर के विकास के बाद उनसे कम्यूनिकेट के लिए बाइनरी सिस्टम 0 और 1 का प्रयोग किया गया है। यह कंप्यूटर की आधारभूत भाषा होती है। इस बाइनरी सिस्टम दुवारा कम्यूनिकेट को ही मशीनी भाषा कहते है।
2.संयोजन भाषा(Combination Language):- 0और 1 का उपयोग कंप्यूटर के लिए आसान नहीं था। इसलिए इसे आसान बनाने के लिए Combination Language का अविष्कार हुआ जिसमे नंबर की जगह पर Symbol का इस्तेमाल किया जाता है। इसे हम Assembly Language या Symbol Language भी कहते है।
3.ऊँच्चस्तरीय भाषा(High Level Language):- कंप्यूटर का कमर्शियल उपयोग बढ़ने के साथ एक और समस्या हुई, हर एक कमर्सिअल कंप्यूटर उपयोगकर्ता को अपने जरुरत के हिसाब से प्रोग्राम की जरुरत होने लगी। लेकिन कंप्यूटर के वर्क सिस्टम को समझने बाले बहुत कम लोग थे इसलिए इसे और आसान बनाने के लिए प्रोग्रामर ने  हाई लेवल भाषा का अविष्कार किया जिसमे इंग्लिश शब्द, नंबर्स Symbol  का इस्तेमाल  करके प्रोग्राम को लिखा जाने लगा जिसे समझना आसान था। इसमें लिखे प्रोग्राम को Inter-Preter का इस्तेमाल करके मशीनी भाषा  में बदल दिया जाता था। उदाहरण-C,C++,Java,HTML Etc.

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 21, 2020

हार्ड डिस्क क्या है? HDD के प्रकार।

हार्ड डिस्क या HDD कंप्यूटर की परमानेंट मेमोरी है। जिसका उपयोग हम डाटा को स्टोर करने के लिए करते है। सबसे पहले हार्ड डिस्क को IBM कंपनी दुवारा बनाया गया था, जिसका वजन 250 किलोग्राम था।और इसकी झमता बहुत कम 5Mb थी। बाद में हार्ड डिस्क में बहुत से बदलाब किये गए।  जिसकी झमता को बढ़ाया या और वजन में भी कमी की गयी। हार्ड डिस्क के अंदर एक राउंड डिस्क लगी होती जिसकी स्पीड के ऊपर डाटा Store स्पीड निर्भर होती है। हार्ड डिस्क को आरपीएम(RPM) में मापा जाता है।
Hard Disk ka kya work Hai ? in Hindi

हार्ड डिस्क कितने तरह की होती है?:-

हार्ड डिस्क को डाटा स्टोरेज झमता और स्टोर करने की स्पीड के आधार पर बाँटा गया है।
  • IDE (Intergrated Drive Electronics)- इन्हे ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक्स और Parrallel Advance Technology Attachment Drive कहते है। यह एक समय में 8 Bit डाटा को Send कर सकती है।
  • SATA (Serial Advance Technology Attachment Drive)- यह एक सेकंड में 300Mb डाटा तक ट्रांसफर कर सकती है। इसमें सिर्फ एक ड्राइव को ही जोड़ सकते है।
  • SCSI (Small Computer System Interface Drive)- यह एक सेकंड में 640 MB डाटा तक ट्रांसफर कर सकती है। इसमें अधिकतम  16 ड्राइव जोड़े जा सकते है।
  • SAS (Serial Attached SCSI Drive)- इसमें एक सेकण्ड में ८०५ डाटा को ट्रान्सफर कर सकते है। इसके Cable के साथ हम अधिकतम 128 ड्राइव को जोड़ सकते है।
अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 21, 2020

कम्पाइलर क्या है? कम्पाइलर का काम क्या है?

कम्पाइलर कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर का ही हिस्सा है। कम्पाइलर से हम किसी सोर्स भाषा को किसी भी टारगेट भाषा में बदलते है। हर प्रोग्रामिंग भाषा के अलग अलग कम्पाइलर होते है। कंप्यूटर में कम्पाइलर वह प्रोग्राम है जिस से हम हाई लेवल भाषा को मशीन भाषा में बदल सकते है। जिस कंप्यूटर भाषा में प्रोग्राम को लिखा जाता है उसे Source Code या Source Language कहते है। और जिस कंप्यूटर भाषा में प्रोग्राम को बदला जाता है उसे Target Source Code /Target Language कहा जाता है।
आसान तरीके से आप ऐसे समझ सकते है की कम्पाइलर एक प्रोग्राम सॉफ्टवेयर है जिसका इस्तेमाल किसी कंप्यूटर भाषा को दूसरे कंप्यूटर भाषा में बदलने के लिए किया जाता है।
Compiler Work Kaisae Karta Hai ? in Hindi  

Compiler कैसे काम करता है?:-

आज के समय में काफी सारी हाई लेवल भाषा उपलब्ध है। जैसे की C,C++,Java,DotNet इत्यादि। इन सभी के अपने अपने नियमानुसार कम्पाइलर होते है। कम्पाइलर लिखे गए सोर्स कोड/भाषा को लाइन वाइज क्रिया करके मशीन/ऑब्जेक्ट भाषा में बदल देता है। ताकि कंप्यूटर इसे पढ़ सके। और प्रक्रिया करके आपको परिणाम दे सके। कम्पाइलर २ भागो में काम करता है सबसे पहले स्टेप में कम्पाइलर इनपुट सोर्स कोड/भाषा को लाइन वाइज चेक करता है।अगर किसी भी लाइन में कोई गलती मिलती है,तो उस  लाइन में error दिखा देता है। अगर प्रोग्राम में कोई भी बड़ी गलती होती है तो कम्पाइलर बही रुक जाता है। दूसरे स्टेप में कम्पाइलर पुरे प्रोग्राम में प्रक्रिया करके परिणाम देता है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 21, 2020

ASCII कोड क्या है? कंप्यूटर डिजिट क्या है?

कंप्यूटर में कुछ भी लिखते है वो सब ASCII कोड में ही लिखा जाता है। कंप्यूटर यूजर डिजिट्स लेटर्स के लिए बाइनरी सिस्टम पर आधारित कोड बिल्ड करके कंप्यूटर को प्रसारित करते है।लेकिन उसके कोड उसी के दुवारा प्रोग्राम्स और आदेश पर लागू होते है। जानकारी के इनपुट आउटपुट सुबिधा के लिए अमेरिका दुवारा एक स्टैण्डर्ड कोड को बनाया गया इसी स्टैण्डर्ड कोड को ASCII कोड कहते है। इस कोड में हर एक डिजिट लेटर्स और नंबर्स को 8 बिट से प्रकट किया गया। इन 8 बिट में सिर्फ 0 और 1 नंबर का उपयोग हुआ है।हर एक ASCII कोड 8 बाइट से बनता है।
ASCII Code Kya Hai? in Hindi 

ASCII कोड का पूरा नाम क्या है?:-

ASCII कोड का पूरा नाम American Standard Code For information Interchange है। इस कोड को अमेरिका में बनाया गया, इसलिए इसका नाम अमेरिका शब्द से शुरू होता है।

Bit और Byte क्या होता है?:-

बिट बाइनरी डिजिट है जो की कंप्यूटर डाटा में सबसे छोटी यूनिट है। बाइट बिट से कई गुना बड़ा होता है। 8 Bit से 1 Byte बनता है।और 8 Byte से 1 ASCII कोड बनता है।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे। अगर आपको इससे सम्बंधित कोई भी सवाल है तो हमें कमेंट में लिखे।
मई 21, 2020

मॉनिटर क्या है?मॉनिटर के प्रकार।

मॉनिटर कंप्यूटर की एक आउटपुट डिवाइस है। इसको विसुअल डिस्प्ले यूनिट भी कहते है। यह देखने में टीवी की तरह ही होता है। मॉनिटर के बिना कंप्यूटर अधूरा होता है इसलिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण डिवाइस है।यह कंप्यूटर आउटपुट को अपनी डिस्प्ले स्क्रीन पर सॉफ्ट कॉपी में प्रदर्शित करता है। मॉनिटर कलर के आधार पर 3 तरह के होते है।
  • मोनोक्रोम(Monochrome)
  • ग्रे-स्केल(Gray-Scale)
  • कलर मॉनिटर(Color Moniter)
Moniter Kitne Type Ke Hote Hai?

1.Monochrome क्या है?:-

यह दो शब्द Mono(Single) और Chrome(Color) से मिलकर बना है। इसलिए इसे सिंगल कलर स्क्रीन कहते है।और यह आउटपुट को Black&White में प्रदर्शित करता है।

2.Gray-Scale क्या है?:-

यह मोनोक्रोम मॉनिटर जैसे ही होते है। लेकिन आउटपुट को ग्रे शेड्स में प्रदर्शित करते है। इस तरह के स्क्रीन ज्यादातर हैंडी कंप्यूटर जैसे लैपटॉप में इस्तेमाल होते है।

3.Color Monitors क्या है?:-

रेडिएशन के समायोजन के रूप में आउटपुट को दर्शाता करता है। यह RGB सिद्धांत के बजह से हाई रेसोलुशन में ग्राफ़िक्स को दर्शाने में सक्षम है। यह कंप्यूटर मेमोरी की झमता के अनुसार 16 से 16लाख तक कलर्स में आउटपुट को प्रदर्शित कर सकते है।

Moniter Kitne Type Ke Hote Hai?:-

मॉनिटर तकनीकी के आधार पर 3 तरह के होते है:-
  • CRT Monitor
  • LCD (Liquid Crystal Display)
  • LED (Light Emitting Diode)
Crt Monitor क्या है?:- CRT मॉनिटर को VDU (Visual display Unit) भी कहते है। इसका मुख्य भाग कैथोड रे Tube है। ज्यादातर मॉनिटर में पिक्चर Tube एलिमेंट टी.वी. की तरह होती है। इस पिक्चर Tube को CRT कहते है। CRT तकनीक सस्ती होती है और बेस्ट कलर में आउटपुट प्रदर्शित करती है। CRT में Electron Gun होती है। जो इलेक्ट्रॉन्स की बीम और कैथोड रेज़ को उत्सर्जित करती है। इलेक्ट्रान बीम इलेक्ट्रॉनिक ग्रिड से पास की जाती है।  ताकि यह इलेक्ट्रान की स्पीड को काम कर सके। CRT मॉनिटर की स्क्रीन पर फास्फोरस की Coding होती है। इसलिए जैसे ही इलेक्ट्रॉनिक बीम स्क्रीन पर टकराती है तो पिक्सेल ब्राइट हो जाते है। और स्क्रीन पर इमेज या लेआउट प्रदर्शित होने लगता है।
LCD (Liquid Crystal Display) क्या है?:- तकनीकी के विकास के बाद मॉनिटर का आकार भी बदला। और CRT मॉनिटर की जगह LCD ने ले ली। LCD मॉनिटर बहुत ही आकर्षक होते है।  यह डिजिटल टेक्नोलॉजी से बने है जो की फ्लैट सरफेस पर क्रिस्टल के दुवारा पिक्चर प्रदर्शित करता है। यह डिस्प्ले पहले लैपटॉप में इस्तेमाल होती थी लेकिन यह बाद में डेस्कटॉप कंप्यूटर में भी प्रयोग होने लगी। यह बिजली की खपत कम करते है और आकार में भी छोटे होते है।
LED (Light Emitting Diode) क्या है?:- LED देखने में एलसीडी के तरह ही होते है एलसीडी में तकनीक को विकास करके LED को बनाया गया। LED 1.5 वाट्स की पावर खपत करती है। और इससे आँखों पर भी काम जोर पास्ता है। LED का पूरा नाम लाइट एमिटिंग डायोड है।यह सेमीकंडक्टर डिवाइस है जो की लाइट को उत्सर्जित करता है। आज के समय में LED का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है।

आपको अगर यह जानकारी पसंद आयी हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे अगर इससे सम्बंधित आपका कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट में लिख सकते है।
मई 21, 2020

कंप्यूटर आउटपुट डिवाइस क्या है?

आउटपुट डिवाइस एक हार्डवेयर डिवाइस होती है। यह कंप्यूटर का फिजिकल पार्ट्स है जिसे हम हाथ से छू सकते है। आउटपुट डिवाइस किसी भी जानकारी जैसे- साउंड डाटा लेआउट इत्यादि  को प्रदर्शित कर सकते है। आउटपुट Devices में General Monitor,Printer,Earphone और Projector आते है।
Computer Ke Output Device Kon Kon se Hai? in Hindi

आउटपुट डिवाइस कोन कोन से होते है ?:- 

  • मॉनिटर(Monitor)
  • प्रिंटर(Printer)
  • प्लॉटर(Plotter)
  • प्रोजेक्टर(Projector)
  • ईरफ़ोन (Ear Phone)

Monitor क्या है?:-

मॉनिटर आउटपुट को  स्क्रीन पर दर्शाता है। मॉनिटर के बारे में और अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करके इस आर्टिकल पढ़े।

Printer क्या है?:-


प्रिंटर कंप्यूटर जानकारी को पेपर पर प्रिंट करता है। या आप ऐसे भी कह सकते है की यह सॉफ्ट कॉपी को हार्ड कॉपी में बदलने का काम करता है। प्रिंटर के बारे में और जानने के लिए यहाँ क्लिक करके पोस्ट पढ़े।

Plotter क्या है?:-


प्लॉटर से ड्राइंग चार्ट ग्राफ इत्यादि को प्रिंट किया जाता है। इस से 3D प्रिंटिंग भी कर सकता है।

Earphone क्या है?:-


हैडफ़ोन या ईरफ़ोन का उपयोग ऑडिओस को सुनने के लिए किया जाता है। ईरफ़ोन/हैडफ़ोन कंप्यूटर के साउंड कार्ड से ऑडियो इनपुट करके वेव साउंड में आउटपुट देते है।

Projector क्या है?:-


प्रोजेक्टर का उपयोग इमेज या वीडियो को एक प्रोजेक्शन स्क्रीन पर दर्शाने के लिए किया जाता है।

Projector के प्रकार:- 

  • वीडियो प्रोजेक्टर (Video Projector)
  • मूवी प्रोजेक्टर (Movie Projector)
  • स्लाइड प्रोजेक्टर (Slide Projector

आपको अगर यह जानकारी पसंद आयी हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे अगर इससे सम्बंधित आपका कोई भी सवाल है तो आप हमें कमेंट में लिख सकते है।

मई 21, 2020

कंप्यूटर इनपुट डिवाइस क्या है?

इनपुट डिवाइस एक हार्डवेयर डिवाइस होती है इनपुट डिवाइस कंप्यूटर पर डाटा भेजने वाला एक्सटर्नल डिवाइस है।कंप्यूटर का मुख्य इनपुट डिवाइस कीबोर्ड और माउस होते है।
Computer Input Device Kya Hai? in Hindi

इनपुट डिवाइस कोन कोन से है?:-

जिस डिवाइस से कंप्यूटर को इनपुट प्राप्त होती है वो सभी इनपुट डिवाइस होते है जिनमे मुख्य इनपुट डिवाइस निचे दिए गए है-
  • कि-बोर्ड(Keyboard)
  • माउस(Mouse)
  • जॉयस्टिक(Joystick)
  • वेब कैमरा(Web Camera)
  • कार्ड रीडर(Card Reader)

Keyboard क्या है?:-

यह कंप्यूटर का बहुत ही महत्वपूर्ण इनपुट डिवाइस है। जिसमे काफी सारी कुंजियाँ होती है जिनकी मदद से हम कंप्यूटर में टेक्स्ट & नंबर को इनपुट करते है। कीबोर्ड टाइप करने के साथ साथ यह कंप्यूटर को कुँजी की मदद से Control भी कर सकता है।

Mouse क्या है?:-

माउस का असली नाम पॉइंटिंग डिवाइस है। यह चूहे की बनाबट जैसा लगता है,इसलिए इसे माउस कहा जाता है। माउस की मदद से हम कंप्यूटर को निर्देश देने का काम करते है।

Joystick क्या है?:-

जॉयस्टिक एक इनपुट डिवाइस है।  जिसका उपयोग गेम खेलने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग हम ग्राफ़िक ऍप्लिकेशन्स के लिए भी कर सकते है।

Web Camera क्या है?:-

वेब कैमरा एक कैमरा ही होता है।जिसे कंप्यूटर के साथ अलग से जोड़ा जाता है। यह इमेज/ वीडियो को इनपुट के रूप कंप्यूटर पर दर्शाता है।

Card Reader क्या है?:-

कार्ड रीडर का इस्तेमाल MMC(Multi Media Card) को पढ़ने के लिए किया जाता है। कार्ड रीडर की मदद से हम मेमोरी कार्ड /डिजिटल कैमरा कार्ड को कंप्यूटर से जोड़ते है। यह एक इनपुट डिवाइस है जो मेमोरी कार्ड को जोड़कर कंप्यूटर में डाटा इनपुट/ट्रांसफर करता है।

इस आर्टिकल में आपको समझ आ गया होगा कंप्यूटर इनपुट डिवाइस क्या है?अगर फिर भी आपका इस से सम्बंधित कोई भी सवाल है।तो आप हमें कमेंट में लिख सकते है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी हो, तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे।

मई 21, 2020

Processor क्या है?

यह एक बहुत ही उपयोगी माइक्रो चिप है जो मदर बोर्ड में CPU बॉक्स में लगी होती है। प्रोसेसर को CPU भी का जाता है जिसका पूरा नाम Central Processing Unit होता है. प्रोसेसर का उसे लैपटॉप कंप्यूटर मोबाइल जैसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में क्या जाता है. यह इलक्ट्रोनिक Device में ब्रेन की तरह काम करता है। प्रोसेसर का काम डिवाइस में सारी एक्टिविटी की प्रोसेसिंग करना और सॉफ्टवेयर & हार्डवेयर को प्रबंधन करने का होता है। प्रोसेसर की स्पीड को Gigahertz में मापते है। प्रोसेसर जितने ज्यादा कोर का होता है उतनी ही अच्छी परफॉरमेंस देता है। आज के टाइम में ज्यादातर 4 Core और 6 Core प्रोसेसर उपयोग किये जाते है।    
Processor Kitne Type Ke Hote Hai?in Hindi

प्रोसेसर की यूनिट क्या है?:-

प्रोसेसर की यूनिट Gigahertz(GHz) है। इसकी स्पीड की झमता को GHz में मापा जाता है।

Processor का काम क्या होता है?:-

प्रोसेसर इनपुट डाटा को प्रक्रिया करके आउटपुट देता है। प्रोसेसर का मुख्य काम  डिवाइस में पुरे डाटा में प्रोसेसिंग करना है।

Processor में Core क्या है?:- 

प्रोसेसर में कोर प्रोसेसर की झमता को दर्शता है। प्रोसेसर में जितने ज्यादा कोर होते है उतनी ही ज्यादा प्रोसेसर की प्रक्रिया झमता होती है। अगर हम ड्यूल कोर प्रोसेसर पर हैवी वर्क करते है तो वह लोड को नहीं संभाल पाता और हैंग या स्लो प्रोसेसिंग करता है। Core प्रोसेसर नाम निचे दिए गए है -
  • Dual Core (2 Core)
  • Quad Core(4 Core)
  • Hexa Core(6 Core)
  • Octo Core(8 Core)
  • Deca Core10 Core)
मोबाइल फ़ोन में आज के समय में हेक्सा & ऑक्टो कोर प्रोसेसर ज्यादातर उपयोग होते है। कंप्यूटर में प्रोसेसर को जनरेशन के हिसाब से बांटा गया है जैसे की -i3,i5, i7 ,i9 Ka Use Hota Hai.

प्रोसेसर बनाने वाली मुख्य कम्पनियाँ।:-

  • Intel
  • AMD
  • Qualcomm
  • MTK(MediaTek)
  • SPRD(Spreadtrum)
  • IBM
  • Samsung
  • Motorola
  • HP(Hewlett-Packard)

इस आर्टिकल में आपको समझ आ गया होगा Processor क्या है?अगर फिर भी आपका इस से सम्बंधित कोई भी सवाल है।तो आप हमें कमेंट में लिख सकते है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी हो, तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे।

बुधवार, 20 मई 2020

मई 20, 2020

कंप्यूटर बेसिक यूनिट क्या है?

कंप्यूटर की यूनिट उन्हें कहते है जिनसे की कंप्यूटर की गणना का काम शुरू होता है।कंप्यूटर की यूनिट्स निचे दी गयी है:-


  • Bit(बिट)
  • Byte(बाइट)
कंप्यूटर की बेसिक यूनिट्स बिट और बाइट होती है या आप यह भी कह सकते है की कंप्यूटर की बेसिक यूनिट बाइनरी डिजिट होती है।
Computer Unit Kon Kon Se Hai? 

Bit:-

बिट यानी बाइनरी डिजिट कंप्यूटर की मेमोरी की सबसे छोटी यूनिट होती है। यह मेमोरी में बाइनरी नंबर 0 और 1को प्रकट करती है। यह बाइनरी का सबसे छोटा रूप है।

Byte:-

बाइट कंप्यूटर की मानक यूनिट होती है। कंप्यूटर की मेमोरी में कीबोर्ड दुवारा दबाया गया प्रत्येक वर्ड & नंबर ASCII कोड में प्रकट होता है। और एक ASCII कोड में 8 बाइट होते है। और 1 बाइट में 8 बिट होते है।

इस आर्टिकल में आपको समझ आ गया होगा कंप्यूटर बेसिक यूनिट क्या है?अगर फिर भी आपका इस से सम्बंधित कोई भी सवाल है।तो आप हमें कमेंट में लिख सकते है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी हो, तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे।

मई 20, 2020

माउस क्या है? यह कितने प्रकार के होते है?

माउस एक इनपुट डिवाइस है। जिसका रियल नाम Pointing Device है। माउस का उपयोग कंप्यूटर स्क्रीन पर आइटम फोल्डर पर क्लिक करके ओपन करने के लिए किया जाता है, और इसका उपयोग आइटम को सेलेक्ट करने के लिए होता है। माउस दुवारा यूजर कंप्यूटर को इंस्ट्रक्शन देता है।  सिंपल माउस में ३ बटन होते है।  दोनों साइड के बटन प्राइमरी बटन (लेफ्ट बटन) और सेकेंडरी बटन (राइट बटन) होता है। इनको हम राइट क्लिक और लेफ्ट क्लिक कहते है। तीसरा बटन स्क्रॉल व्हील होता है जो की लेफ्ट और राइट बटन के बिच में लगा होता है।
Mouse Kitne Type Ke Hote Hai? in Hindi

माउस कितने प्रकार के होते है।:-

कंप्यूटर माउस को काफी स्टेप्स में डेवेलोप किया गया है। जिन्हे हम ५ भागो में बाँट सकते है।:-
  • मैकेनिकल माउस
  • ऑप्टिकल माउस
  • वायरलेस माउस
  • ट्रैकबॉल माउस
  • स्टाइलस माउस

Mechanical माउस:-

Mechanical Mouse Definition in hindi

इस माउस को 1972 में बिल इंग्लिश ने बनाया था। मकेनिकल माउस में निर्देश के लिए एक बॉल का उपयोग किया गया है। इसमें निचे की तरफ एक छोटी सी बॉल लगी होती है।जब हम माउस को चलाते है, तब यह बॉल मूव होती है इस बॉल के मूव से ही कंप्यूटर को निर्देश पहुँचता है। इन माउस का उपयोग अब नहीं होता है।

Optical माउस:-

Optical Mouse Kya Hai Aur Iske Work In Hindi
ऑप्टिकल माउस में LED-Light एमिटिंग डायोड और DSP – Digital Signal Processing Technology का उपयोग किया गया है। इसमें बॉल की जगह पर एक छोटा सा बल्ब लगा होता है। इन्हे USB के दुवारा कंप्यूटर से जोड़ा जाता है। आजकल इन्ही माउस का उपयोग किया जाता है।

Wireless माउस:-

Wireless Mouse kya hai in hindi
बिना USB-वायर के माउस को वायरलेस माउस कहते है।  इसे Cordless माउस भी कहा जाता है। यह माउस रेडियोफ्रीक्वेंसी (RF) टेक्नोलॉजी पर आधारित होते है।  यह देखने में ऑप्टिकल माउस जैसा होता है। इसके उपयोग के लिए ट्रांसमीटर और रिसीवर की जरूर होती है। ट्रांसमीटर माउस में ही अंदर लगा रहता है और रिसीवर को अलग से कंप्यूटर में लगाया जाता है।

Trackball माउस:-

trackball mouse kya hai? in Hindi
यह माउस वायरलेस माउस जैसा ही होता है लेकिन इसमें कंप्यूटर को निर्देश देने के लिए ट्रैक बॉल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ऊपर की तरफ एक बॉल लगी होती है कंप्यूटर स्क्रीन पर कर्सर को मूव करने के लिए बॉल को फिंगर या अँगुठे का उपयोग किया जाता है। इन माउस को इस्तेमाल करना थोड़ा Hard होता है इसलिए यह माउस बहुत कम देखने को मिलते है।

Stylus माउस:-

Stylus/Pen Mouse Kya Hai? in hindi
इस माउस को Gordan Stewart ने बनाया था जिसे gStick माउस भी कहते है। इसमें G का मतलब गॉर्डन है। इस तरह के माउस का इस्तेमाल टचस्क्रीन Device में होता है।


माउस काम कैसे करता है?:-

माउस से काफी सरे काम किये जा सकते है और इन काम को करने के लिए माउस कुछ Actions करता है जो की निचे दिए गए है।-

Pointing:-

जब हम कर्सर को किसी आइटम/फोल्डर के ऊपर ले जाते है। जब कर्सर उस पर रुकता है, तब उसकी डिटेल्स दिखने लगती है इसी प्रक्रिया को पॉइंटिंग कहते है।  यहाँ आप ऐसे भी समझ सकते है की किसी भी आइटम/फोल्डर को कर्सर दुवारा टच करना ही पॉइंटिंग होता है।

Selecting:-

कंप्यूटर स्क्रीन पर किसी भी आइटम/फोल्डर पर कर्सर पॉइंटिंग करके माउस का लेफ्ट बटन दबाते है तो वह आइटम सेलेक्ट हो जाता है। या आप माउस का लेफ्ट बटन को दबाकर माउस को मूव करते है तब माउस कर्सर की मूव लोकेशन में इतने भी आइटम/फोल्डर आते है वो सब सेलेक्ट हो जाते है। जब आइटम सेलेक्ट होता है तब उस आइटम के चारो तरफ एक कलर हाईलाइट हो जाता है जिससे हमें पता चल जाता है की यह आइटम सेलेक्ट हो गया है।

Clicking:-

माउस बटन को किसी भी आइटम पर दबाने की क्रिया को क्लिक कहते है। क्लिक करने के लिए हम माउस के किसी भी बटन को दबाकर छोड़ देते है। यह 2 तरह से होते है।:-

  • Left Click
  • Right Click

Left Click- माउस के लेफ्ट बटन दबाने को लेफ्ट क्लिक कहते है। यह भी अलग अलग तरह से काम करते है जो की निचे दिए गए है।-
  • Single Click- माउस के लेफ्ट बटन को एक बार दबाने को सिंगल क्लिक कहते है। सिंगल क्लिक से किसी भी आइटम को सेलेक्ट करना मेनू को खोलना इत्यादि काम किये जाते है।
  • Double Click- माउस के लेफ्ट बटन को एक साथ जल्दी से 2 बार दबाकर छोड़ने को डबल क्लिक कहते है।डबल क्लिक शॉर्टकट्स की तरह काम करता है। डबल क्लिक से किसी भी आइटम फोल्डर इत्यादि को खोलने के लिए किया जाता है। इसके अलावा अगर आप किसी वर्ड पर डबल क्लिक करते है तो वह वर्ड सेलेक्ट हो जाता है इसलिए यह सेलेक्ट के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
  • Triple Click- माउस के लेफ्ट बटन को एक साथ 3 बार जल्दी से दबाने को ट्रिपल क्लिक कहते है।ट्रिपल क्लिक का इस्तेमाल बहुत कम होता है।इसकी मदद से हम किसी भी पैराग्राफ को एक साथ पूरा सेलेक्ट कर सकते है।
Right Click- माउस के राइट बटन को दबाने को राइट क्लिक कहते है। किसी आइटम पर राइट क्लिक करने से उस आइटम के साथ किये जाने बाले काम की लिस्ट खुल जाती है। 

    Dragging और Dropping क्या है?:-

    कंप्यूटर में किसी भी आइटम/फोल्डर को एक जगह से दुरी जगह पर उठाकर रखने के लिए माउस के इस फीचर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए आप किसी भी आइटम पर माउस कर्सर को पॉइंटिंग करके लेफ्ट बटन को दबाकर रखे अब आप कर्सर को दूसरे जगह पर लेके जाये जहां पर आपको आइटम लेके जाना है ,और फिर उस जगह पर लेफ्ट बटन को छोड़ दे अब आप का आइटम दूसरे जगह पर मूव हो जायेगा इस पुरे प्रक्रिया को Dragging और Dropping कहते है।  

    Scrolling:-

    माउस व्हील के दुवारा किसी डॉक्यूमेंट Web-Page को ऊपर निचे मूव किया जाता है।इसी प्रक्रिया को स्क्रॉलिंग कहते है।

    इस आर्टिकल में आपको समझ आ गया होगा माउस क्या है?अगर फिर भी आपका इस से सम्बंधित कोई भी सवाल है।तो आप हमें कमेंट में लिख सकते है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी हो, तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे।